सोमवार, 2 दिसंबर 2013

amba devi dharul

 According to the scriptures of Hinduism, where - as part of Mother Sati into pieces, Jewellery worn or loose clothes there - there was established Shaktipeeth | These are known as the most sacred | The shrine is spread over the entire Indian subcontinent | India - Partition of India In 42 Shaktipeeth left | 1 Pakistan and 4 Bangladesh, 1 Sri Lanka and 1 in Tibet and 2 Shaktipeeth Nepal located in | Also Devi Bhagavata Purana in the 108 Sktipito and Devi Gita 72 suspected Tipito describes the | mother Ambaँ goddess Darud This Shaktipeeth Devi Bhagavata Purana comes within 108 Sktipito | The Goddess is Ambaँ | large fair is held here every year during which the mother Serawali Nvratri millions of devotees come from Baitul district in Maharashtra | Ambaँ Divine Shaktipeeth Satpura green - filled Vadio The middle section is located on a mountain | The railway and bus station, 90 km from Baitul Shaktipeeth. Located on the edge of | here Ambaँ devotees of the deity faithfully comes to the mother goddess mother Ambaँ that her wishes must Puri | ............. Jai Devi Ambaँ

शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

मक्केश्वर शिवलिंग का असली सच

अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है 'मक्केश्वर लिंग' (मक्केश्वर महादेव) ग्रन्थ 'रामावतारचरित' के युद्धकांड प्रकरण में उपलब्ध एक अत्यंत अद्भुत और विरल प्रसंग 'मक्केश्वर लिंग' से संबंधित हैं, जो प्राय: अन्य रामायणों में नहीं मिलता है। वह प्रसंग जितना दिलचस्प है, उतना ही गुदगुदानेवाला भी। शिव रावण द्वारा याचना करने पर उसे युद्ध में विजयी होने के लिए एक लिंग (मक्केश्वर महादेव) दे देते हैं और कहते हैं कि जा, यह तेरी रक्षा करेगा, मगर ले जाते समय इसे मार्ग में कहीं पर भी धरती पर नहीं रखना। लिंग को अपने हाथों में आदरपूर्वक थामकर रावण आकाशमार्ग द्वारा लंका की ओर प्रयाण करते हैं। रास्ते में उन्हें लघुशंका की आवश्यकता होती है। वे आकाश से नीचे उतरते हैं तथा इस असमंजस में पड़ते हैं कि लिंग को कहाँ रखें? तभी ब्राह्मण वेश में नारद मुनि वहाँ पर प्रगट होते हैं, जो रावण की दुविधा भाँप जाते हैं। रावण लिंग उनके हाथों में यह कहकर पकड़ाकर जाते हैं कि वे अभी निवृत्त हो कर आ रहे हैं।... रावण लघु-शंका से निवृत्त हो ही नहीं पाता! संभवत: वह प्रभु की लीला थी। काफ़ी देर तक प्रतीक्षा करने के उपरांत नारद जी लिंग धरती पर रखकर चले जाते हैं। तब रावण के खूब प्रयत्न करने पर भी लिंग उस स्थान से हिलता नहीं है और इस प्रकार शिव द्वारा प्रदत्त लिंग की शक्ति का उपयोग करने से रावण वंचित हो जाता है।(पृ.-295-297) यह स्थान वर्तमान में सऊदी अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है सऊदी अरब के पास ही यमन नामक राज्य भी है इसका उल्लेख श्रीमद्भागवत में मिलता है श्री कृष्ण ने कालयवन नामक राक्षस के विनाश किया था यह यमन राज्य उसी द्वीप पर स्थित है भगवान शिव के जितने रूप और उपासना के जितने विधान संसार भर में प्रचलित रहे हैं, वे अवर्णनीय हैं। हमारे देश में ही नहीं, भगवान शिव की प्रतिष्ठा पूरे संसार में ही फैली हुई है। उनके विविध रूपों को पूजने का सदा से ही प्रचलन रहा है। शिव के मंदिर अफगानिस्तान के हेमकुट पर्वत से लेकर मिस्र, ब्राजील, तुर्किस्तान के बेबीलोन, स्कॉटलैंड के ग्लासगो, अमेरिका, चीन, जापान, कम्बोडिया, जावा, सुमात्रा तक हर जगह पाए गए हैं। अरब में मुहम्मद पैगम्बर से पूर्व शिवलिंग को 'लात' कहा जाता था। मक्का के कावा में संग अवसाद के यप में जिस काले पत्थर की उपासना की जाती रही है, भविष्य पुराण में उसका उल्लेख मक्केश्वर के रूप में हुआ है। इस्लाम के प्रसार से पहले इजराइल और अन्य यहूदियों द्वारा इसकी पूजा किए जाने के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। ऐसे प्रमाण भी मिले हैं कि हिरोपोलिस में वीनस मंदिर के सामने दो सौ फीट ऊंचा प्रस्तर लिंग था। यूरोपियन फणिश और इबरानी जाति के पूर्वज बालेश्वर लिंड के पूजक थे। बाईबिल में इसका शिउन के रूप में उल्लेख हुआ है। कई वर्ष बीत गए है मक्केश्वर महादेव की पूजा बिल्वपत्र व गंगा जल से नही हुई है जय जय शिव शम्भो महादेव शम्भो| सभी एक स्वर में बोलिए मक्केश्वर महादेव की जय

बुधवार, 18 सितंबर 2013

हे शंभु बाबा मेरे भोलेनाथ -Hey shambhu Baba mere Bholenath

शिव नाम से जगत मे उजाला हरि भक्तो के मन मे उजाला हे शंभु बाबा मेरे भोलेनाथ तीनो लोक मे तु ही तु श्रध्दा सुमन मेरा मन्दिर पतरी जीवन भी अर्पण कर दूँ | हे शंभू बाबा मेरे भोलेनाथ तीनो लोक मे तु ही तु जग का स्वामि है , अन्तर्यामी है तु मेरे जीवन की अनमिट कहानी है तु तेरी शक्ती अपार तेरा पावन है धाम तेरी पुजा ही जिवन आधार धुल तेरी चरणो की लेकर जीवन को साकार किया मन मे है कामना और कुछ जानु ना जिंदगी भर करू तेरी आराधना सुख की पहचान दे तु मुझे शक्ति दे प्रेम सब से करू ऐसा वरदान दे तुने दिया बल निर्बल को अग्यानी को ग्यान दिया हे शंभ बाबा मेरे भोलेनाथ तीनो लोक मे तू ही तू — w

मन मेरा मन्दिर शिव मेरी पुँजा , शिव से बडा कोई ना दुँजा |

सत्य है ईश्वर शिव है जिवन सुन्दर ये संसार है तीनो लोक है तुझमे तेरी माया अपरम्पार है | मन मेरा मन्दिर शिव मेरी पुँजा | शिव से बडा कोई ना दुजा |बोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरम | मन मेरा मन्दिर शिव मेरी पुँजा .......... पार्वती जब सीता बनकर जय श्री राम के सम्मुख आयी | राम ने उनको माँता कहकर शिव शंकर की महिमा गायी | शिव भक्ति मे सबकुछ सुझा शिव से बडा ना कोई ना दुँजा | मन मेरे शिव महिमा के गुण गाये जा | तेरी जटा से निकली गंगा और गंगा ने भीष्म दिया | तेरी भक्तो की शक्ति ने सारे जगत को जीत लिया | तुझको सब देवो ने पुँजा शिव से बडा नही कोई दुँजा | बोल सत्यम शिवम बोल तु सुन्दरम मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाये जा | मन मेरा मन्दिर शिव मेरी पुँजा शिव से बडा कोई ना दुँजा| —

शिव शंकर को जिसने पुँजा उसका ही उध्दार हुआ ,अन्तकाल को भव सागर मे उसका बेडा पार हुआ |

शिव शंकर को जिसने पुँजा उसका ही उद्धार हुआ | अन्तकाल को भवसागर मे उसका बेडा पार हुआ | हर हर महादेव शिव शंभु हर हर महादेव शिव शंभु | डमरू वाला है जग मे दलायु बडा दिन दुखियो का दाँता जगत का पिता | सब पर करता है ये भोलाशंकर दया सबको देता है ये आसरा | इन पावन चरणो मे अर्पण आकर जो इक बार हुआ | अन्तकाल मे भवसागर से उसका बेडा पार हुआ | हर हर महादेव शिव शंभु | नाम ऊँचा है सबसे महादेव का वन्दना इसकी करते है सब देवता | इसकी पुजा से वरदान पाते है सब शक्ति का दान पाते है सब | नाग असुर प्राणी सब पर भोले का उपकार हुआ | अन्तकाल को भवसागर मे उसका बेडा पार हुआ | शिव शंकर को जिसने पुजा उसका ही उद्धार हुआ —

सुबह सुबह ले शिव का नाम शिव आयेंगे तेरे धाम

सुबह सुबह ले शिव का नाम शिव आयेंगे तेरे काम | सुबह सुबह ले शिव का नाम कर ले बंधे ये शुभ काम | खदको राख लपेटे फिरते ओरो को देते धन-धान | देवो के हित विष पी डाला नीलकण्ड को कोटी प्रणाम | सुबह सुबह ले शिव का नाम .... ओम नम : शिवाय | शिव के चरणो मे मिलते है सारे तीरथ धाम | करनी का सुख तेरे हाथो, शिव के हाथो प्रणाम | सुबह सुबह ले शिव का नाम शिव आयेंगे तेरे धाम .... ओम नम : शिवाय | शिव के रहते कैसी चिन्ता साथ रहे प्रभु आठो धाम | शिव को भज ले सुख पायेंगा , मन आयेंगा आराम| ओम नम : शिवाय

Ravindra mankar मै एक सच्चा महाकाल भक्त हुँ | भगवान शिव को अपना गुरूदेव मानता हुँ |